तुम तो बस मेरी हो

Antarvasna, kamukta:

Tum to bas meri ho मेरी कंपनी में अब मेरा प्रमोशन हो चुका था और प्रमोशन होने के बाद मुझे कोलकाता जाना था कोलकाता में मेरा दोस्त भी रहता है। मैंने अपने दोस्त से कहा कि क्या वह मेरे लिए एक घर की तलाश कर देगा तो उसने मुझे कहा कि हां क्यों नहीं जब उसने मुझे फोन किया तो उसने मुझे कहा कि मैंने तुम्हारे लिए घर देख लिया है। अब मैं भी कोलकाता जाने की पूरी तैयारी में था, मेरे माता-पिता बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि मैं कोलकाता जाऊं परंतु मुझे कोलकाता तो जाना ही था। मैं अब कोलकाता पहुंच चुका था और सबसे पहले तो मैं अपने दोस्त से मिला मेरा दोस्त कोलकाता में काफी वर्षों से रह रहा है वह मुझे कहने लगा कि तुमसे इतने वर्षों बाद मिलकर अच्छा लग रहा है। मैं और मेरा दोस्त दोनों ही काफी समय बाद एक दूसरे को मिल रहे थे इस वजह से हम दोनों ही बहुत खुश थे।

मुझे अपने दोस्त से मिलने की खुशी तो थी ही और मुझे एक अच्छा घर भी मिल चुका था जहां पर मैं रह रहा था अब मैंने अपना ऑफिस जॉइन कर लिया था और हर रोज की तरह मैं सुबह अपने ऑफिस के लिए निकल जाया करता। धीरे धीरे आस पड़ोस में भी मेरी मुलाकात लोगों से होने लगी थी और अब लोग मुझे भी पहचानने लगे थे। रविवार के दिन मैं घर पर ही था उस दिन मेरा दोस्त आकाश मुझसे मिलने के लिए आया आकाश मुझे कहने लगा कि सुमित आज तुम घर पर ही हो। मैंने उसे कहा आज रविवार के दिन भला मैं कहां जाऊंगा मैंने सोचा कि आज आराम कर लेता हूं। आकाश मुझे कहने लगा कि आज दोपहर के वक्त मेरे दोस्त के घर पर बर्थडे पार्टी है आकाश ने मुझे अपने साथ चलने के लिए कहा परंतु मैंने उसे मना कर दिया मैंने उसे कहा कि वहां मेरा आना ठीक नहीं होगा वह लोग मुझे पहचानते भी तो नहीं है लेकिन आकाश मुझे कहने लगा कि तुम मेरे साथ चलो। मैं आकाश के साथ जाने के लिए तैयार हो गया दोपहर के वक्त जब हम लोग गए तो आकाश ने मुझे अपने दोस्तों से मिलवाया उनसे मिलकर मुझे अच्छा लगा और हम लोग वहां पर काफी देर तक रुके।

उसी पार्टी के दौरान मेरी मुलाकात आशा के साथ हुई जब मैं आशा से मिला तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा हम लोग एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश हुए आशा के साथ मेरी दोस्ती बढ़ने लगी थी और अब हम लोग फोन पर भी बातें करने लगे थे। आशा ने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया जब आशा ने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया तो मैं आशा के घर पर गया और आशा ने अपने मम्मी पापा से मुझे मिलवाया आशा के मम्मी पापा से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा और उनसे मिल कर मैं बहुत खुश था। आशा के मम्मी पापा को ऐसा लग रहा था कि मेरे और आशा के बीच में कुछ चल रहा है जबकि आशा और मेरे बीच में ऐसा कुछ भी नहीं था हम दोनों एक अच्छे दोस्त थे और दोस्त होने के नाते आशा ने मुझे अपने परिवार वालों से मिलवाया था। अब मैं आशा के घर पर अक्सर आया जाया करता था उसके परिवार को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि उसके परिवार के सब लोग बहुत ही अच्छे हैं और आशा से मेरा मिलना जुलना भी था। एक दिन आशा और मैं साथ में बैठे हुए थे तो आशा ने मुझे कहा कि आज मम्मी ने मुझसे पूछा कि क्या तुम्हारे और सुमित के बीच में कुछ चल रहा है। जब आशा ने मुझे यह बात बताई तो मैंने आशा को कहा मुझे तो पहले से ही यह लग रहा था कि तुम्हारे मम्मी पापा को मुझ पर शक है कि हम दोनों के बीच में कुछ तो चल रहा है। आशा मुझे कहने लगी कि मेरे परिवार वाले तुम्हारी बहुत तारीफ करते हैं और जब तुम पहली बार घर पर आए थे तो मेरी मम्मी ने मुझे कहा था कि सुमित बहुत ही अच्छा लड़का है लेकिन मुझे नहीं पता था कि इतनी जल्दी वह लोग मुझसे इस बारे में बात कर लेंगे। जब आशा ने मुझसे इस बारे में बात की तो मुझे भी लगा कि कहीं ना कहीं मैं भी आशा के व्यक्तित्व से बहुत ज्यादा प्रभावित हूं क्योंकि जैसा मैं सोचा करता था आशा बिल्कुल वैसी ही लड़की है। आशा से पहली बार मेरी मुलाकात हुई थी तो पहली मुलाकात में ही हम दोनों के बीच खुलकर बातें होने लगी थी आशा के परिवार वाले भी मुझे स्वीकार कर चुके थे। अब मैं भी चाहता था कि वह लोग मेरे परिवार वालो से मिले हैं इसलिए मैंने अपने मम्मी पापा को कुछ दिनों के लिए कोलकाता बुला लिया।

जब वह लोग घर पर थे तो मैंने उन्हें आशा के बारे में कुछ भी नहीं बताया था परंतु जब वह लोग कोलकाता पहुंचे तो मैंने उन्हें आशा के बारे में बताया। मैंने उनसे कहा कि आशा के परिवार वाले मुझसे उसकी शादी करवाना चाहते हैं लेकिन मेरे पापा को शायद यह बात बिल्कुल भी स्वीकार नहीं थी और उन्होंने मुझे कहा कि सुमित बेटा ऐसे ही तुम किसी से भी शादी कैसे कर सकते हो। मैंने उन्हें कहा पापा मैंने आपको इसीलिए तो यहां बुलाया है मैं चाहता हूं कि आप लोग आशा के परिवार से एक बार मिले पापा कहने लगे कि ठीक है बेटा हम लोग आशा के परिवार से मिलते हैं। जब वह लोग आशा के परिवार से मिले तो उन लोगों को आशा का परिवार अच्छा लगा आशा के पिताजी एक अच्छे पद पर कार्यरत हैं वह बहुत ही अच्छे इंसान हैं। अब इस बात से सब लोग खुश थे और किसी को भी कोई आपत्ति नहीं थी सब लोग अब हमारे रिश्ते को स्वीकार कर चुके थे। हालांकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि आशा के साथ मैं शादी के बंधन में बंध जाऊंगा लेकिन आशा का साथ मुझे अच्छा लगा और शायद यही वजह थी कि हम दोनों ही एक दूसरे के साथ शादी के बंधन में बनने के लिए तैयार थे।

अब हम लोगों की सगाई हो चुकी थी और हमने अपनी सगाई में अपने कुछ दोस्तों को बुलाया था मेरे दोस्त भी आए थे सब लोग बड़े ही खुश थे और मुझे भी इस बात की खुशी थी कि आशा के साथ मेरी सगाई तय हो चुकी है। जब हम लोगों की सगाई हुई तो उसके थोड़े ही समय बाद आशा ने मुझसे कहा कि सुमित हम लोगों को शादी कर लेनी चाहिए मैंने आशा से कहा यदि तुम यह चाहती हो तो मैं इस बारे में पापा मम्मी से बात कर लेता हूं। हम चाहते थे कि हमारी शादी दिल्ली में ही हो हम लोगों की शादी की तैयारी मेरे छोटे भाई ने हीं करवाई थी उसी ने सारी शादी का अरेंजमेंट करवाया था। हम लोगों की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई और आशा के पापा मम्मी भी दिल्ली आ कर खुश थे उन्हें किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं हुई और सब कुछ बहुत ही अच्छे से हो चुका था। अब हम दोनों पति-पत्नी बन चुके थे और कुछ समय हम लोग दिल्ली में ही रहने वाले थे। हम दोनों की शादी हो चुकी थी और शादी की पहली रात हम दोनों ने बिस्तर पर थे आशा मुझसे बात करने में शर्मा रही थी मैंने आशा से कहा आज से पहले तो तुम कभी शर्माती नहीं थी। उसकी शर्मो हया ही मेरे लिए एक अलग फीलिंग पैदा कर रही थी मैंने उसके घूंघट को उठाते हुए आशा की तरफ देखा तो आशा मेरी तरफ देख रही थी और वह मुझे कहने लगी सुमित आज मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा है मैंने उसे कहा तुम इतना क्यों घबरा रही हो तुम बहुत ही घबरा रही हो? मैंने भी उसके होठों को चूम लिया और जैसे ही उसके होठों को मैंने चूमा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और काफी देर की चुम्मा चाटी के बाद आशा को मैंने बिस्तर पर लेटा दिया था और आशा अब गर्म होने लगी थी उसकी गर्माहट भी बढ़ने लगी थी। आशा के स्तन मैं दबा था तो वह मुझसे लिपटते हुए कहती कि सुमित मुझसे रहा नहीं जाएगा मैंने उसे कहा कि रहे तो मैं भी नहीं पा रहा हूं और यह कहते ही मैंने उसके कपड़ों को खोल दिया जब उसकी ब्रा को मैंने उतार फेंका तो उसके स्तनों को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं उसके स्तनों को चूसने लगा।

मैं जिस प्रकार से उसके निप्पल को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान कर रहा था उससे मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था काफी देर तक मैं उसके स्तनों के ऐसे ही रसपान करता रहा। मैंने जब अपने लंड के बीच में उसकी दोनों स्तनों को किया तो वह उत्तेजित होने लगी वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेने के लिए तैयार बैठी थी आखिरकार उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया जैसे ही मेरा लंड उसके मुंह के अंदर गया तो वह बड़े ही अच्छे तरीके से लंड चूस रही थी। आशा मेरे लंड को ऐसी चूस रही थी मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा था मैंने यह सोच लिया था कि आज आशा की चूत को मै खोल कर रख दूंगा। मैंने जब उसकी पैंटी को उतार कर उसकी चूत पर अपनी जीभ को लगाना शुरू किया तो वह कहने लगी तुम और अच्छे से मेरी चूत को चाटो। मैंने उसकी चूत के अंदर तक अपनी जीभ को घुसा दिया और उसकी चूत से निकलते हुआ पानी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था वह अपने आपको बिल्कुल रोक ना सकी।

मैंने भी अपने लंड पर थूक लगाते हुए आशा की चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया उसकी चूत के अंदर जैसे ही मेरा लंड घुसा तो वह चिल्लाने लगी जिस प्रकार से वह चिल्ला रही थी उससे मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड होता तो मुझे और भी आनंद आता लेकिन मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि आशा की वर्जिनिटी को मैं ही खत्म करूंगा। आशा की वर्जिनिटी को मैंने खत्म कर दिया उसकी चूत से निकलता हुआ खून बहुत बढ रहा था उसकी चूत एकदम टाइट है जिस वजह से मैं उसकी चूत मार कर अपने आपको बड़ा ही खुशनसीब समझ रहा था। आज वह मेरी पत्नी बन चुकी थी मैंने उसकी चूत के मजे करीब 10 मिनट तक लिए 10 मिनट बाद मेरा वीर्य पतन हुआ। मैंने उसकी चूत को साफ करते हुए अपने लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया। आशा दोनों पैरों को खोलते ही मेरे ऊपर से आई और अपनी चूत के अंदर मेरे लंड को ले लिया मैंने उसके स्तनों का हाथों से पकड़ा हुआ था। बहुत देर तक वह मेरे साथ ऐसा ही करती रही मेरा वीर्य बाहर आ चुका था मेरा वीर्य जैसे ही उसकी चूत के अंदर गया तो उसे मजा आ गया और वह बहुत खुश हो गई।


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