पैंटी तक नहीं पहनने दी

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Panty tak nahi pahanne di मां कहने लगी सुमित तुम जल्दी से तैयार हो जाओ मैंने मां से कहा मां बस तैयार हो रहा हूं। पापा कार में मेरा इंतजार कर रहे थे पापा बार-बार हॉर्न बजाए जा रहे थे मैं जल्दी से तैयार हुआ और हम लोग अब मेरी मौसी के घर के लिए निकल चुके थे। मैं अपने ऑफिस से लौटा ही था कि पापा और मम्मी ने मुझे कहा कि आज हम लोग तुम्हारी मौसी के घर जा रहे हैं। मैंने पापा मम्मी से कहा कि आप लोगों ने मुझे पहले यह बात क्यों नहीं बताई तो वह कहने लगे कि हम लोग तुम्हें पहले इस बारे में बताना चाहते थे लेकिन हमने सोचा कि शायद हम लोग भी वहां ना जा पाए लेकिन अचानक से हम लोगो का प्लान तुम्हारी मौसी के घर जाने का बन गया। हम लोग मौसी के घर पहुंचने ही वाले थे रास्ते से मैंने मिठाई ले ली थी मिठाई लेके मैं और मम्मी पापा जैसे ही मौसी के घर पहुंचे तो मौसी हमारा इंतजार कर रही थी। मेरी मौसी विदेश में रहती हैं और वह काफी समय बाद दिल्ली लौटी थी अब हम लोग उनके साथ ही थे उन्होंने अपने घर में काम करने वाले राजू से कहा कि राजू तुम्हारे साहब नजर नहीं आ रहे।

मेरे मौसा जी ना जाने कहां थे वह अभी तक घर नहीं लौटे थे मौसी ने उन्हें फोन किया और कहा कि आप कहां चले गए तो वह कहने लगे कि बस थोड़ी देर बाद आ रहा हूं। हम लोग मौसी के साथ बात कर रहे थे मम्मी मौसी से पूछ रही थी कि वह कैसी है काफी समय बाद मौसी हमसे मिल रही थी मौसी कम ही दिल्ली आया करती हैं वह अपने बच्चों के पास अमेरिका में रहती हैं मौसा जी भी अमेरिका में ही जॉब करते है और अब वह लोग अमेरिका में ही रहते हैं। थोड़ी देर बाद मौसा जी लौट आये और हम लोग साथ में बैठ कर बात कर रहे थे मौसी कहने लगी कि तुम लोग भी कभी अमेरिका आ जाओ। मैंने मौसी से कहा मौसी हमारे पास कहां वक्त है आप तो जानते ही हैं कि मैं तो अपनी जॉब में बिजी रहता हूं और पापा भी अपने ऑफिस से फ्री नहीं हो पाते हैं और रही बात मम्मी की तो मम्मी भी घर के कामों में ही उलझी रहती हैं। हम लोग मौसी के घर पर काफी देर तक रुके रहे और फिर हम लोग अपने घर लौट आए काफी समय बाद मौसी से मिलकर अच्छा लगा।

जब हम लोग वापस लौटे तो हमारे पड़ोस में रहने वाले मिश्रा जी हमारे घर पर आए हुए थे पापा ने उन्हें देखते ही पूछा मिश्रा जी आज आप हमारे घर पर आए हैं क्या कुछ जरूरी काम है। वह कहने लगे कि हां आप से एक जरूरी काम था पापा ने मिश्रा जी से कहा कि क्या जरूरी काम था तो उन्होंने बताया कि उनके पड़ोस में आजकल कुछ लोग रहने के लिए आए हैं और उनकी वजह से उन्हें बड़ी परेशानी हो रही है। पापा ही सोसायटी के सेक्रेटरी थे इस वजह से पापा के पास वह शिकायत करने के लिए आए हुए थे। मिश्रा जी को पापा ने कहा कि ठीक है मैं इस बारे में देख लूंगा और जब पापा ने उन लोगों से बात की तो उसके बाद भी उन लोगों की आय दिन शिकायतें आती रहती थी जिस वजह से सोसाइटी के लोग काफी परेशान हो चुके थे आखिरकार पापा को पुलिस का सहारा लेना पड़ा। जब पापा ने पुलिस को बुलवाया तब जाकर बात को वह लोग सुलझा पाए, एक दिन मैं घर पर ही था तो मैंने मां से कहा मां मेरा दोस्त आकाश आने वाला है मां ने कहा ठीक है बेटा मैं आकाश के लिए खाना बना देती हूं। आकाश जब हमारे घर पर आया तो आकाश मुझे कहने लगा कि सुमित आज तुम घर पर ही हो तो हम लोग कहीं घूम आते हैं मैंने आकाश को कहा लेकिन हम लोग कहां घूमने के लिए जाएंगे। आकाश कहने लगा मेरे भैया ने एक शोरूम खोला है क्या हम लोग वहां पर चलें मैंने आकाश को कहा ठीक है हम लोग वहां चलते हैं। आकाश के भैया के शोरूम में हम लोग चले गए और जब हम लोग शोरूम में गए तो शोरूम में हम लोग काफी देर तक बैठे रहे उसी शोरूम में जब मेरी नजर सुहानी पर पड़ी तो मुझे सुहानी पहली नजर में ही भा गई। सुहानी को देखकर मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और मैंने आकाश से मदद ली मुझे पता चला कि वह आकाश के भैया के शोरूम में नौकरी करती है। मैंने सुहानी का नंबर किसी प्रकार से निकलवा लिया लेकिन अब मैं चाहता था कि मैं सुहानी से बात करूं और उसके लिए मैंने आकाश के भैया की मदद ली। मैंने जब सुहानी से बात करनी शुरू की तो हम लोग एक दूसरे को जब भी मिलते तो हमें बहुत अच्छा लगता मैंने सुहानी को अपने दिल की बात कह दी। जब मैंने सुहानी को अपने दिल की बात कही तो वह भी इंकार ना कर सकी वह बहुत ज्यादा खुश हो गई और जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत अच्छा समय बिताया करते।

सुहानी ने एक दिन मुझे अपनी बहन से मिलवाया जब सुहानी ने मुझे अपनी बहन से मिलवाया तो उस दिन सुहानी ने मुझे बताया कि उसके परिवार में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। पहली बार ही मुझे सुहानी ने अपने परिवार के बारे में बताया था सुहानी के पिताजी की तबीयत ठीक नहीं रहती है सुहानी जितना भी कमाती है उससे अधिक तो उनके अस्पताल का खर्चा लग जाता है जिससे सुहानी काफी परेशान भी रहती है। मैंने सुहानी को कहा देखो सुहानी तुम्हे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है सब कुछ ठीक हो जाएगा सुहानी मुझे कहने लगी सुमित जब से तुम मेरी जिंदगी में आए हो तब से मेरी जिंदगी में सब कुछ अच्छा हो रहा है और मैं बहुत खुश हूं कि तुम मेरी जिंदगी में आए तुम्हारे आने से मेरी जिंदगी पूरी तरीके से बदल गई है। सुहानी के परिवार से भी मैं मिलने लगा था मैंने यह बात अपने माता-पिता को अभी तक नहीं बताई थी मैं चाहता था कि उन्हें मैं यह बात बताऊं लेकिन मैं उन्हें यह बात अभी तक नहीं बता पाया था। सुहानी ने एक दिन मुझसे पूछा कि सुमित क्या हम लोग एक दूसरे से शादी कर पाएंगे तो मैंने सुहानी से कहा सुहानी तुम मुझसे यह सवाल क्यों पूछ रही हो। सुहानी ने मुझे कहा कि सुमित मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूं और तुम्हारे बिना शायद मैं जिंदगी बिता ना पाऊं इसलिए मैं चाहती हूं कि हम लोग जल्दी से शादी कर ले।

सुहानी अब चाहती थी कि हम लोग शादी कर ले उसके लिए मैंने अपने माता-पिता से बात करना ठीक समझा और मैंने जब अपने माता-पिता को सुहानी के बारे में बताया तो वह लोग सुहानी से मिलना चाहते थे उन्होंने जब सुहानी से बात की तो उन्हें बहुत अच्छा लगा और वह सुहानी से मेरी शादी करवाने के लिए मान चुके थे। मेरे लिए इससे ज्यादा खुशी की बात शायद कुछ भी नहीं थी क्योंकि सुहानी और मैं अब एक होने जा रहे थे हम लोगों की सगाई हो चुकी थी और जल्द ही हम दोनों की शादी हो गई शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्द सब कुछ हो जाएगा। मेरी और सुहानी की अब शादी हो चुकी थी और हम दोनो पति-पत्नी बन चुके थे मैं चाहता था कि सुहानी के साथ में जमकर सेक्स का मजा लूटू और पहली रात जब मैं अपने रूम में गया तो सुहानी भी रूम में बैठी हुई थी। हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे से बात की और मैंने जब कमरे की बत्ती को बुझाई तो सुहानी मेरी बाहों में आ गई। सुहानी मेरी बाहों में आ चुकी थी मैं सुहानी के होठों को चूमने लगा कमरे को मैंने पूरी तरीके से रोमांटिक बना दिया था कमरे में अंधेरा था इस वजह से हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को बडे अच्छे से महसूस कर रहे थे जैसे ही सुहानी ने मेरे लंड को पकड़ा तो उसके मुंह से हल्की आवाज आई और कहने लगी कि तुम्हारा लंड तो बड़ा ही मोटा है। मैंने भी सुहानी के कपड़े उतारकर उसके स्तनों का रसपान करना शुरू किया उसके स्तनों को मैं बड़े अच्छे से दबा रहा था मैं उन्हें अपने मुंह में लेकर बहुत देर तक चूसता रहा। जिस प्रकार से मैंने सुहानी के स्तनों का रसपान किया वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी और मुझे कहने लगी तुम मेरी चूत में अपने लंड को डाल दो।

मैंने सुहानी की चूत के बाहर अपने लंड को बहुत देर तक रगड़ा सुहानी की चूत की दीवार पर जब मैं अपने लंड को रगड रहा था तो उसकी चूत के अंदर अब मेरा लंड जाने के लिए बेताब था। मैंने भी धक्का देते हुए उसकी कोमल चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया जैसे ही मेरा लंड उसकी कोमल चूत में घुसा तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी कि तुम्हारा लंड तो बड़ा ही मोटा है। सुहानी की चूत के अंदर तक मैंने अपने लंड को घुसा दिया मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और बड़ी तेज गति से उसे चोदना शुरू किया मैं जिस गति से उसे चोद रहा था उससे मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने अब उसे घोड़ी बना दिया मैंने जब घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो मैंने उसको मेज के साहरे खड़ा किया हुआ था। मुझे वह कहने लगी आज तुम थकने वाले नहीं हो मैंने उसे कहा आज तो मैं तुम्हें रात भर तुम्हारी चड्डी भी नहीं पहने दूंगा। मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना जारी रखा था करीब 10 मिनट हो गए थे लेकिन अभी तक ना तो मेरा वीर्य गिरा था और ना ही सुहानी थकने का नाम ले रही थी परंतु जब मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया तो सुहानी कहने लगी लगता है मैं झड़ने वाली हूं।

उसने मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में कसकर जकड़ लिया और मै उसकी चूत के अंदर बाहर लड को किए जा रहा था जैसे ही मेरा वीर्य बाहर की तरफ निकला तो सुहानी बहुत ज्यादा खुश हो गई और मुझे कहने लगी कि आज तुम्हारे साथ सेक्स करने में मजा आ गया। अभी भी मैं सुहानी को चोदना चाहता था मैंने उसकी चूत के मजे तीन बार और लिए करीब 45 मिनट की चुदाई के बाद अब मैं थक चुका था और मैं थोड़ी देर सो गया। जब मैं उठा तो मैंने उसकी गांड में लंड डाला और मैंने उसकी गांड के अंदर लंड घुसाया तो वह चिल्लाकर मुझे कहने लगी तुमने आज ही मेरी गांड मार ली। सुहानी की गांड मारने में बड़ा मजा आया उसकी गांड के मजे बहुत देर तक लिए। पूरी रात भर हम दोनों एक दूसरे के बदन को महसूस करते रहे और सुबह के वक्त मैं बड़ी गहरी नींद में था मै अपने आपको बहुत थका हुआ महसूस कर रहा था। सुहानी के साथ पहली रात मेरी बड़ी मजेदार रही।


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