नंबर वन जुगाड़ के साथ

Number one jugad ke sath:

antarvasna, kamukta हम लोग ज्वाइंट फैमिली में रहते हैं कुछ समय पहले मेरे चाचा की लड़की की शादी तय हो गयी मेरे चाचा की लड़की का नाम हर्षिता है वह मुझसे उम्र में कुछ वर्ष ही छोटी है उसकी शादी जब तय हुई तो उसके कुछ समय बाद ही मुझे पता चला कि वह किसी लड़के से प्रेम करती है और यह बात मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आई, जैसे ही यह बात मेरे परिवार में मेरे पापा और चाचा को पता चलती तो शायद वह लोग उसे घर से निकाल देते इसलिए मैंने उस वक्त समझदारी  से काम लिया और हर्षिता से मैंने पूछा की हर्षिता क्या तुम्हारा किसी लड़के के साथ कोई चक्कर चल रहा है? वह मुझे कहने लगी नहीं मेरा किसी लड़के के साथ कोई चक्कर नहीं चल रहा, मैंने उसे कहा देखो तुम मुझसे झूठ ना कहो यदि यह बात चाचा और पापा को पता चले तो तुम्हें पता है कि वह तुम्हारे साथ क्या करेंगे, वह कहने लगी नहीं भैया ऐसा कुछ भी नहीं है।

मैंने उसे कहा देखो तुम मुझसे छुपाओ मत मुझे सब कुछ पता चल चुका है मैंने आज अपने दोस्त से तुम्हारे बारे में सब कुछ सुन लिया तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा कि तुम मुझे अपने मुंह से सब बता दो, वह मुझे कहने लगी कि भैया मैं आपको सब कुछ बताती हूं लेकिन आप यह बात किसी को मत बताइएगा मैंने उसे कहा ठीक है मैं यह बात किसी को नहीं बताऊंगा लेकिन तुम्हें मुझे सब कुछ सच बताना पड़ेगा वह कहने लगी मैं आपको सब कुछ बताऊंगी। उसने मुझे कहा मैं एक लड़के से प्रेम करती हूं उसका नाम सुजीत है सुजीत और मैं एक दूसरे को मेरे दोस्त के घर पर मिले थे और वहीं से हम दोनों का प्रेम प्रसंग शुरू हुआ मैं नहीं चाहती थी कि मैं सुजीत के साथ रिलेशन में रहूं लेकिन मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और मेरे और सुजीत के बीच में रिलेशन चलने लगा, मैं सुजीत को बहुत पसंद करती हूं और उसके बिना मैं रह नहीं सकती लेकिन पापा ने मेरी शादी किसी और ही लड़के से तय कर दी जब तक मैं उन्हें यह सब बताती तब तक बहुत देर हो चुकी थी अब आप ही बताइए कि मैं क्या करूं, मैंने हर्षिता से कहा ठीक है तुम मुझसे सच कह रही हो तो मैं तुम्हारी इसमें मदद कर सकता हूं लेकिन मैं नहीं चाहता कि चाचा और पापा को कोई तकलीफ हो क्योंकि उन लोगों ने हमारे लिए बहुत कुछ किया है और मैं तो तुमसे यही कहूंगा कि तुम सुजीत को भूल कर अपने नए जीवन की शुरुआत करो।

हर्षिता मुझे कहने लगी कि भैया यह कैसे संभव हो पाएगा मैं सुजीत से प्रेम करती हूं और उसी के साथ मैं अपना जीवन बिताना चाहती हूं लेकिन पापा और ताऊ जी ने मेरी शादी किसी और से ही तय कर दी है मैं बहुत ज्यादा दुविधा में हूं और आपसे मदद चाहती हूं, मैंने उसे कहा तुम मुझे एक बार सुजीत से मिलाओ, मैं जब उससे मिला तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा मैंने जैसा सोचा था वह वैसा लड़का नहीं था वह बड़ा ही शरीफ और एक अच्छे घर से ताल्लुक रखता है मैंने भी सोचा कि हर्षिता अपनी जगह ठीक है यदि सुजीत और हर्षिता की शादी हो जाएगी तो शायद हर्षिता भी सुजीत के साथ खुश रहेगी, सुजीत की एक अच्छी कंपनी में नौकरी लग चुकी थी और उससे बात कर के मुझे ऐसा लगा कि वह हर्षिता के लिए बिल्कुल सही रहेगा लेकिन मेरे पास भी अब समय बहुत कम था क्योंकि हर्षिता की सगाई पापा और चाचा जी ने करवा दी थी और वह शायद मेरी बात कभी मानते नहीं लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत करते हुए उन दोनों को यह बात कह दी, मेरे पापा ने मुझे जोरदार थप्पड़ मारा और कहा कि क्या मैंने तुम्हें यही सिखाया था और चाचा भी मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए मैंने उन्हें कहा आप लोग अपनी जगह बिल्कुल सही है लेकिन हर्षिता ने जिस लड़के को चुना है वह उसके लिए ठीक है यदि आप लोग उससे उसकी शादी नहीं करेंगे तो उसका दिल टूट जाएगा आपको एक बार उस लड़के से जरूर मिलना चाहिए। वह दोनों मेरी बात सुनने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थे और उन्होंने मुझे कहा की यदि तुमने आगे कभी इस बारे में बात की तो तुम घर से निकल जाना, मैं भी बहुत मायूस हो गया और हर्षिता भी अपने कमरे में चली गई चाचा जी ने उस दिन हर्षिता को बहुत बुरा भला कहा मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था मुझे लगा कि मैं भी उन दोनों की मदद नहीं कर पाऊंगा इसीलिए हर्षिता ने घर से भागने का फैसला किया और एक दिन वह सुजीत के साथ घर से भाग गई जब दोनों भाग गए तो मेरे पापा मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे कि शायद यह तुम्हारी ही गलती की वजह से हुआ है।

अब सारा दोष मेरे ऊपर आ चुका था मैं भी बहुत ज्यादा परेशान हो गया मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए लेकिन तब मुझे लगा कि मुझे अब घर छोड़कर चले जाना चाहिए, मैंने भी घर छोड़ दिया और मैं दूसरे शहर चला गया जब मैं दूसरे शहर आया तो मैंने वहां पर एक छोटी-मोटी नौकरी करनी शुरू कर दी जिससे कि मेरा गुजारा चलने लगा इस बात को काफी वर्ष हो चुके थे और ना तो मेरा अब घर से कोई संपर्क था और ना ही मैं किसी से मिल पाया था लेकिन एक दिन एक इत्तेफाक से मेरी मुलाकात सुजीत से हो गई जब मुझे सुजीत मिला तो वह मुझे देखकर खुश हो गया उसने मुझे गले लगा लिया उसने मुझसे कहा हम लोग आपको कब से ढूंढ रहे हैं लेकिन आपका ना ही कोई नंबर है और ना ही हम घर वालों को आपके बारे में कुछ पूछ पाते। मैंने सुजीत से कहा मैंने तो कब का घर छोड़ दिया है शायद मैं अब कभी घर वापिस भी ना जाऊं, वह मुझे कहने लगा हम दोनों को घर वालों ने अपना लिया है और आपको भी कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है आप अब घर लौट सकते हैं।

यह बात सुनकर मुझे बड़ा ही अजीब लगा मैंने सोचा यदि इन दोनों को घर वालों ने अपना ही लिया था तो मुझे घर से भागने की जरूरत क्या थी इसलिए मैं अपने घर लौट आया, मैं जब घर लौटा तो मेरे पापा बहुत खुश हुए और उन्होंने मुझे गले लगा लिया उसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया इतने वर्षों में मुझे कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिरकार हुआ क्या है। जब मैं हर्षिता से मिला तो उसका एक छोटा बच्चा भी हो चुका था और मेरी उम्र भी अब शादी की हो चुकी थी लेकिन मैंने तो शादी के बारे में कभी सोचा ही नहीं था और ना ही मैं शादी करना चाहता था लेकिन मुझे शादी तो करनी हीं थी परंतु मैं अपनी पसंद की लड़की से ही शादी करना चाहता था और उसके लिए मैंने भी लड़की देखनी शुरू कर दी। मेरे पापा और मेरे चाचा ने मेरे लिए काफी रिश्ते देखे लेकिन मुझे कोई समझ ही नहीं आया एक दिन हर्षिता मुझसे कहने लगी कि आज आप हमारे घर पर आ जाओ आप आज तक हमारे घर पर कभी आए भी नहीं हो, मैंने सोचा चलो आज हर्षिता से मिलने उसके घर पर चला जाए, मैं हर्षिता से मिलने उसके घर पर चला गया उस दिन सुजीत ने मुझे अपने परिवार वालों से मिलवाया और हर्षिता भी मुझसे मिलकर बहुत खुश थी, हर्षिता मुझे कहने लगी कि भैया यदि आप पापा और चाचा को मेरे और सुजीत के बारे में नहीं बताते तो शायद उन्हें इस बारे में पता भी नहीं चलता और वह लोग मेरे बारे में कुछ गलत ही समझ लेते हैं लेकिन अब उन लोगों ने हमें अपना लिया है मुझे इस बात की बहुत खुशी है और सब लोग भी बहुत खुश हैं तभी मैंने एक सुंदर सी लड़की सामने आते हुई देखी। जब सुजीत ने मुझे उस सुंदर सी लड़की से मिलवाया तो सुजीत मुझे कहने लगा यह हमारे पड़ोस में रहती हैं और इनका नाम मधु है। मैं मधु से मिलकर बहुत खुश था उसकी हवस भरी नजरे मुझे देख रही थी। उसके बाद मैं जब भी हर्षिता से मिलने के लिए आता तो मधु मुझे जरूर मिला करती वह मुझे देख कर मुस्कुरा देती।

मैंने एक दिन मधु से बात कर ली। एक दिन उसने मुझे कहा कभी आप हमारे घर पर भी आ जाया कीजिए। मै मधु से मिलने के लिए एक दिन उसके घर पर चला गया। वह मुझे बड़े ही हवस भरी नजरों से देख रही थी मैं भी उसे घूरे जा रहा था। उसने मुझे कहा मैं आपको छत पर ले जाती हूं, जब वह मुझे छत पर ले गई तो वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी। उसने अपने हाथ को मेरे लंड पर लगा दिया उसका हाथ मेरे लंड पर लगते ही मेरा लंड खड़ा हो गया, मैंने उसके होंठो को चुसना शुरू किया और उसे जमीन पर लेटा दिया। मैंने उसके स्तनो को अपने मुंह में लिया तो उसे अच्छा महसूस होने लगा मैं उसके निप्पल को अपने मुंह में लेता। मैंने उसके पेट में चुमना शुरू किया तो उसकी उत्तेजना और भी अधिक होने लगी उसे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा।

मैंने उसकी चूत पर लंड को सटा दिया उसकी चूत से मेरे लंड को गर्मी महसूस होने लगी। मैंने भी धक्का देते हुए अपने लंड को उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवा दिया। जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा लगा, मधु को भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा वह अपने पैरों को चौड़ा करने लगी और मैं उसे तेजी से धक्के मारने लगा। मेरे धक्के इतने तेज होते कि उसका बदन दर्द हो जाता वह मुझे कहती आपने तो मुझे आज बड़े अच्छे से चोदा। वह अपने मुंह से सिसकिया ले रही थी मैं उसे लगातार तेजी से चोदे जा रहा था जैसे ही मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई। वह कहने लगी आज तो मजा आ गया इतने समय से मैं आपको देख रही थी। मैंने कहा कोई बात नहीं आज के बाद तुम्हें मे मजे देता ही रहूंगा वह एक नंबर की जुगाड़ है और ना जाने मोहल्ले में उसके किस किसके साथ चक्कर चल रहा है। मैंने तो यह भी सुना है उसका सुजीत के साथ अफेयर था लेकिन सुजीत हर्षिता के साथ प्यार करता है इसलिए मैंने उसे इस बारे में नहीं कहा।


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